Oct 4, 2009

मुस्लिम समाज की फितरत ही है हराम के माल पर मुँह मारने की

मुस्लिम समाज की फितरत ही है हराम के माल पर मुँह मारने की

अभी अभी एक सज्‍जन के ब्‍लाग पर "क्या गैर मुस्लिम औरतों को मुस्लिम मर्द भाते हैं ?" सर्वेक्षण पढ़ कर आया था किन्‍तु उसके तुरंत बाद मुझे भी हमदर्द कालेज ने एक और सवेक्षण मुझे भी बता कर किया था कि मुस्लिमो मर्दो की फितरत है हराम के माल पर मुँह मारने की, मुस्लिम चुकि मुस्लिमों अधिक कन्‍या भ्रूण हत्‍या के कारण उन्‍हे अपने धर्म में चार नही मिल पाती तो बाकि धर्मो में मुँह मारते फिरते है, जैसे समाज में ये धर्म सिर्फ सेक्‍स करने लिये ही आया। पता नही सेक्‍स के लिये यह धर्म कितना नीचे गिरेगा ? ये धर्म शक्‍शियत को छोड़कर सेक्सियत की और उन्‍मुख हो रहा है यही कारण है कि सबसे ज्‍यादा मुस्लिम ही सेक्‍सुवल बीमारियो से ग्रसित है, और हकीम सहाब ने मुस्लिम भाईयों की उन बिमारियों के लिये इंद्रीवर्धक तथा जोशे तरन्नुम जैसे यंत्र के पोस्‍टर मस्जिदों के आस पास भारी मात्रा में लगवा देते है और न जाने हकीम लोग इसी प्रकार के न जाने कौन कौन से टोटके अपना कर अपनी जेब गरम कर लेते है, सेक्‍स जनित रोगो के कारण XXX जस का तस रह जाता है।

Jul 19, 2008

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